Wednesday, April 19, 2017

मेडिकल कॉलेज पहुंचे नर्सेज का नारा-हमारा हॉस्टल खाली करो

एसपी मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करते नर्सेज। 
पीबीएमनर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स इस बात पर नाराज है कि उनके लिए बने हॉस्टल में मेडिकल गर्ल्स स्टूडेंट को ठहरा दिया गया है जबकि नर्सिंग स्टूडेंट को किराये के कमरे लेकर रहना पड़ रहा है। इसका विरोध करते हुए बुधवार को वे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। प्रदर्शन किया। नारे लगाए-हमारा हॉस्टल हमें दो। आखिरकार मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से बातचीत में इस पर राजी हो गए कि तीन महीने में हॉस्टल पूरी तरह नर्सेज को सौंप दिया जाएगा।

राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मदनलाल, संयोजक अब्दुल वाहिद की अगुवाई में कॉलेज पहुंंचे स्टूडेंट्स इस बात पर आक्रोश जता रहे थे कि नर्सिंग हॉस्टल के लिए अलग-अलग भवन होने के बावजूद नर्सिंग बॉयज को हॉस्टल नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही अर्जेंट टेंपरेरी आधार पर लगे कर्मचारियों को वेतन, एरियर नहीं मिलने की समस्या भी बताई। प्राचार्य डा.आर.पी.अग्रवाल ने कहा, मेडिकल गर्ल्स हॉस्टल बन रहा है। जून तक इसकी पहली मंजिल बन जाएगी। इनमें लड़कियों को शिफ्ट कर देंगे। इसके साथ ही नर्सिंग बॉयज स्टूडेंट के लिए भी हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए छह करोड़ रुपए मंजूर हाेने की उम्मीद है।

नर्सिंग के लिए तीन हॉस्टल, बॉयज के लिए नहीं

नर्सिंगवर्किंग वूमन के लिए कैंसर हॉस्पिटल के पास हॉस्टल बना हुआ है। स्टूडेंट्स के लिए पीडिएट्रिक हॉस्पिटल के पास पुराना हॉस्टल है जिसे ठीक कर चालू कर दिया गया। अब नए कॉलेज के साथ ही मेडिकल कॉलेज मैदान के एक कोने में भी हॉस्टल बन गया। ऐसे में नर्सिंग गर्ल्स स्टूडेंट के लिए जगह की कमी नहीं। बॉयज के लिए हॉस्टल की जरूरत है। स्टूडेंट चाहते हैं नर्सिंग के जो जो हॉस्टल खाली हुए हैं उन्हें मेडिकोज को देने की बजाय नर्सिंग बॉयज को अलॉट करें।

^नर्सिंग स्टूडेंट किराये के कमरों में रह रहे हैं और उनके हॉस्टल में मेडिकल स्टूडेंट्स को जगह दी गई है। इस पर आक्रोश स्वाभाविक है। इसी मुद्दे पर प्राचार्य से बात की है। तीन महीने में हॉस्टल खाली करवाकर नर्सेज को देने का आश्वासन मिला है। अब्दुलवाहिद, संयोजक नर्सेज एसोसिएशन

इसलिए मेडिकल गर्ल्स स्टूडेंट्स के लिए कमरों की जरूरत : मेडिकलयूजी की 250 सीटें, 25फीसदी लड़कियों के लिए, एडमिशन 45 फीसदी तक एसपी मेडिकल कॉलेज में यूजी की 250 सीट्स है इनमें से लड़कियों के लिए 25 फीसदी आरक्षित हैं। लड़कियों का सलेक्शन इन आरक्षित सीटों से कहीं अधिक लगभग 45 फीसदी तक हो रहा है। ऐसे में हर साल सौ से अधिक लड़कियां कॉलेज पहुंच रही हैं। चौथे साल तक इनकी संख्या लगभग 400 हो जाती है। हॉस्टल में लगभग 200 लड़कियों के रहने का ही इंतजाम है। इसीलिए इन्हें नर्सिंग गर्ल्स हॉस्टल में ठहराने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। मेडिकल गर्ल्स हॉस्टल बन रहा है। उसमें 252 कमरे होंगे। यह हॉस्टल बनने के बाद जगह की कमी नहीं रहेगी। 

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