Wednesday, April 19, 2017

सुविधा-संपन्न है हमारी यूनिवर्सिटी, टीचिंग स्टाफ आैर स्टूडेंट्स की कमी चिंता का विषय

अजयमेरूके प्रांगण में ज्ञान-ध्यान का आलय है महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय। कुलगीत के यह बोल साकार कर रहे इस विश्वविद्यालय का परिसर राज्य की सभी सरकारी विश्वविद्यालयों की तुलना में स्वच्छ हरा-भरा यानी “क्लीन एंड ग्रीन’ है।


यही नहीं विश्वविद्यालय में तीन शोधपीठ हैं, पिछले तीन सालों में भरतमुनि रंगमंच, अब्दुल कलाम भवन आैर विश्वकर्मा भवन का लोकापर्ण हुआ तो कुबेर भवन, मंगलम भवन, सत्यार्थ सभागार, डॉ. विक्रम साराभाई भवन आैर अमृतायन भवन का शिलान्यास हो चुका है। पिछले तीन सालों में दस नए पाठ्यक्रमों को मिलाकर विश्वविद्यालय से संबद्ध चार जिलों के 285 कॉलेजों में 147 अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित हैं। परीक्षा परिणाम जारी करने में हमारा विश्वविद्यालय प्रदेश में अव्वल है। वित्तीय हालात अन्य विश्वविद्यालयों से बेहतर हैं, लेकिन करीब 75 फीसदी स्थाई शैक्षणिक स्टॉफ की कमी आैर विश्वविद्यालय की कम विद्यार्थी संख्या चिंता का विषय है।

नैक टीम आने को लेकर एमडीएसयू में तैयारियां।

ये कमियां भी हैं, जिन्हें कर रहे दूर

75फीसदी कम है टीचिंग स्टाफ, इस वजह से छात्र भी कम : साधनसंपन्न इस यूनिवर्सिटी में छात्र संख्या सुनेंगे तो आप चौंक जाएंगे। यहां सिर्फ 1375 विद्यार्थी हैं, जो शहर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के विद्यार्थी संख्या की तुलना में एक चौथाई भी नहीं है। यूं कह सकते हैं कि यूनिवर्सिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर तो ऐसा है, जिसमें शहर के सभी राजकीय महाविद्यालयों को इसमें शिफ्ट कर दें तो भी जगह बचेगी, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। यही नहीं, यूनिवर्सिटी में टीचिंग स्टाफ भी करीब 75 फीसदी कम है। नियमानुसार हर विभाग में 1 प्रोफेसर, 2 रीडर, 3 सहायक आचार्य के अलावा पर्याप्त सपोर्टिंग स्टाफ होना चाहिए। लेकिन हर विभाग में लंबे अरसे से यह कमी बरकरार है।

^यूनिवर्सिटी में लगभग हर विभाग में परमानेंट टीचिंग स्टाफ की कमी है। इसी वजह से विद्यार्थी संख्या कम है। टीचिंग स्टाफ की कमी पूरी होते ही विद्यार्थी संख्या बढ़ेगी। फिलहाल विजिटिंग फैकल्टी से काम चलाया जा रहा है। सरकार को टीचिंग स्टाफ की कमी से अवगत करवाया जा चुका है। -प्रो.कैलाश सोडाणी कुलपति, एमडीएस यूनिवर्सिटी

{ राज्यपाल महामहिम कल्याण सिंह द्वारा विश्वविद्यालय के कुलगीत की लाॅन्चिंग की गई।

{ बायोमेट्रिक सिस्टम प्रारंभ हुआ। शैक्षणिक आैर अशैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति दो बार आते-जाते समय दर्ज की जाने लगी।

{ 10 एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत हुए तो 2 अस्सिटेंट प्रोफेसर बनाए गए। शोध पीठों आैर विभिन्न संकायों द्वारा समय-समय पर काॅन्फ्रेंस आैर सेमिनार आयोजित करवाए गए।

{ यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप पीएचडी रूल्स का रिफोर्मेशन आैर रेग्यूलेशन हुआ। रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट (रेट) नियमित आयोजित करवाया जा रहा है।

{ राज्यभर में परिणाम जारी करने में अव्वल रहने के साथ परीक्षाओं में गोपनीयता आैर इंटीग्रिटी के लिए बारकोड आंसर बुक की व्यवस्था प्रारंभ की गई।

{ यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं में सीसीटीवी कैमरों आैर वेबकास्टिंग कनेक्टिविटी से निगरानी व्यवस्था।

{ पेंडिंग प्रोविजनल डिग्रियां आैर अंकतालिका वितरित की गईं। दीक्षांत समारोह हर वर्ष नियमित आयोजित करवाए गए।

{ यूनिवर्सिटी द्वारा मुहामी गांव को गोद लेकर विकास कार्य किए गए। रूसा के तहत विश्वविद्यालय को राज्य सरकार की आेर से 20 करोड़ की ग्रांट मिल चुकी है, जिससे बीस साल बाद विश्वविद्यालय की सभी भवनों को रिनोवेशन करवाया गया।

{ राज्य सरकार द्वारा यूनिवर्सिटी के सीईएसबीएम की प्रशंसा की गई, इसे रोल मॉडल के तौर पर मानकर बाकी विश्वविद्यालयों में प्रारंभ करने के लिए कहा गया।

{ 22 टीचिंग आैर 11 नॉन टीचिंग स्टाफ की स्वीकृति राज्य सरकार से ली गई। भर्ती प्रक्रिया अंडर प्रोसेस है।

{ 2015 से अब तक लगातार तीन साल छात्रसंघ चुनाव कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से करवाए गए। इसके अलावा पीटीईटी, पीसीपीएमटी, बीएसटीसी जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करवाई गईं। इस वर्ष भी पीटीईटी यूनिवर्सिटी द्वारा ही आयोजित करवाई जा रही है।

{ वेस्ट जोन आैर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में लगातार तीन सालों से पहले साल 19, फिर 26 आैर तीसरे साल में 36 यूनिवर्सिटी की टीमों में हिस्सा लिया।

{ वर्ल्ड योगा दिवस हर साल आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा ब्लड डोनेशन कैंप नियमित आयोजित किए जाते हैं।

{ हर साल स्थापना दिवस पर 1 अगस्त को यूनिवर्सिटी कैंपस में पौधारोपण, 10 किलोवॉट का सोलर पॉवर प्लांट, भव्य कल्चरल ईवेंट ऑक्टेव का आयोजन, वेस्ट जोन वाइस चांसलर मीट आैर वेस्टजोन इंटर यूनिवर्सिटी खो-खो वूमन टूर्नामेंट भी यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित करवाए जा चुके हैं। 

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