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Monday, May 1, 2017

May 01, 2017

मास्साब बनने की चाह में उत्साह से दी परीक्षा


सिरोही.
कोटा विश्वविद्यालय की ओर से रविवार को बीएसटीसी परीक्षा 2017 का आयोजन हुआ। परीक्षा दोपहर दो बजे से शुरू हुई जो शाम पांच बजे तक संचालित रही। बारहवीं कक्षा के बाद विद्यार्थी पहली बार शिक्षक बनने की योग्यता के लिए परीक्षा दी। परीक्षा के लिए केन्द्रों पर जब घंटी बजी तो परीक्षार्थियों में डर भी था, लेकिन केन्द्रों में जाकर परीक्षार्थियों के हाथों में प्रश्न पत्र आने के बाद धीरे-धीरे चेहरे से चिंता की लकीरें खत्म हो गई। जब परीक्षा पूरी हुई और केन्द्र से बाहर लौटे तो चेहरों पर मुस्कान देखी गई। परीक्षार्थियों ने बताया कि बीएसटीसी परीक्षा का पर्चा वैसे तो तैयारियों के मुताबिक आया, लेकिन सामान्य ज्ञान, मैंटन ऐबिलिटी ने उलझाए रखा। परीक्षा में कुल 4,572 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इसमें से 4,171 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि 401 अनुपस्थित रहे।

इन केन्द्रों पर हुई

जिला मुख्यालय पर बीएसटीसी परीक्षा के लिए 16 केन्द्र बनाए थे। शहर के आदर्श विद्या मंदिर, अजीत विद्या मंदिर, इमानुअल मिशन स्कूल, एसपी कॉलेज, एनएसपी हायर सेकण्डरी स्कूल, सेंट पॉल स्कूल, आदर्श विद्या मंदिर बालिका, आनन्द विद्या मंदिर, भाटकड़ा राजकीय माध्यमिक विद्यालय, पुराना भवन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, महावीर पब्लिक स्कूल, राजकीय महाविद्यालय, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं नवीन भवन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में परीक्षा का आयोजन हुआ। परीक्षा को लेकर सर्तकता दल के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। 


Thursday, April 27, 2017

April 27, 2017

दो बेटियों ने सालभर निशुल्क पढ़ाया, बच्चे पढ़ते हैं किताब


सिरोही

 गुलाबगंज स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का दानदाताओं के भरोसे कायाकल्प किया जा रहा है। यहां प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने को शिक्षक नहीं थे तो गांव की दो बेटियों ने साल भर बच्चों को निशुल्क पढ़ाया। नतीजतन आज प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे न सिर्फ फर्राटे से किताब पढ़ते हैं बल्कि व्यावहारिकता के मामले में भी खासे आगे हैं।

ऐसे ली पढ़ाने की जिम्मेदारी

यहां सरकारी स्कूल में प्रार?िभक शिक्षा देने के लिए एक भी शिक्षक नहीं था। ऐसे में कार्यवाहक प्रधानाचार्य व एसडीएमसी की ओर  से विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए स्कूल में शिक्षक उपलब्ध कराने की अपील की गई। इस पर गांव की स्नातक शिक्षा प्राप्त कर रही दो बेटियों ने हामी भरी और वह भी निशुल्क। गांव की दिव्या पुत्री जितेन्द्रकुमार पुरोहित और विन्रमता कुमारी पुत्री दयालाल दवे ने अक्टूबर महीने से स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और शैक्षणिक सत्र 2016-17 की समाप्ति तक पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को शिक्षा दी।

जन सहयोग से बदली तस्वीर

गुलाबगंज स्कूल को ग्रामीणों व भामाशाहों का जनसहयोग भी ऐसा मिला कि स्कूल की तस्वीर ही बदल गई। स्कूल के मु?य द्वार पर गड्ढे थे। समतल नहीं होने के कारण विद्यार्थियों व शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ती थी। इस समस्या को ग्रामीणों से देखा नहीं गया और एकजुट होकर साढ़े छह सौ टोली मिट्टी डलवाई। इसके बाद स्कूल में समतीलीकरण का कार्य किया गया। यहीं नहीं बारिश में छत से पानी टपकता था। इसमें भी भामाशाह ने सहयोग किया। 50 हजार रुपए से बरामदे की मर?मत करवाकर विद्यार्थियों को राहत पहुंचाई।

क्रमोन्नत हो गया पर शिक्षक नहीं मिले

रेवदर ब्लॉक में हमेशा शिक्षकों की कमी ही रही है। गुलाबगंज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी यहीं समस्या है। जबकि यह स्कूल हाईवे पर आया हुआ है। इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए तो एक भी शिक्षक नहीं है। स्कूल क्रमोन्नत होने के बावजूद भी प्रधानाचार्य समेत 13 पद रिक्त हैं। वर्तमान में हिन्दी व्या?याता महेश शर्मा, इतिहास के व्या?याता शैतानसिंह देवड़ा समेत दो वरिष्ठ अध्यापक एवं एक शारीरिक शिक्षक कार्यरत हैं।स्कूल उपलब्धि

पर एक नजर

 पहली से बारहवीं कक्षा नामांकन 291 हैं

 दसवीं बोर्ड का परिणाम 80 प्रतिशत से ऊपर।

 दसवीं कक्षा के दो विद्यार्थियों का लेपटॉप के लिए चयन।

  फर्नीचर ग्रामीणों ने स्कूल को भेंट किया।

पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए स्कूल में शिक्षक ही नहीं थे। स्वतंत्रता दिवस व एसडीएमसी बैठक में ग्रामीणों के सामने समस्या रखी तो गांव की दो बालिकाएं पढ़ाने के लिए आगे आईं। नतीजा सबके सामने हैं।

महेश शर्मा, कार्यवाहक, प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गुलाबगंज


Wednesday, April 26, 2017

April 26, 2017

व्हाट्सएप से उपस्थिति भेजने लगे कर्मचारी

सिरोही.

 रोडवेज कर्मचारियों की अनुपस्थिति, ड्यूटी के प्रति लापरवाही व समय पर नहीं आने की प्रवृत्ति पर काफी हद तक अंकुश लग गया है। शिकायतों के बाद मुख्यालय से गत सप्ताह जारी आदेश के पालन में सुबह-शाम कर्मचारियों की हाजिरी रिपोर्ट मुख्य प्रबधंक की ओर से व्हाट्सएप के जरिए एमडी को भेजी जा रही है।

रोडवेज कर्मचारी अब ड्यूटी को लेकर आनाकानी नहीं कर सकेंगे। अब तय समयानुसार पूरी ड्यूटी देनी होगी। आदेश पालन नहीं करने वाले कर्मचारियोंं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  इससे रोडवेज की व्यवस्था में काफी सुधार होगा।

इसलिए की व्यवस्था

अब तक मनमानी के चलते कर्मचारियों को अवकाश व साप्ताहिक अवकाश देने में दिक्कत हो रही थी। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सख्त फैसला किया गया। मुख्य प्रबंधकों को हिदायत दी थी कि सुबह पौने दस से शाम को पौने छह बजे डिपो कर्मचारी रोडवेज स्टैण्ड पर मौजूद रहेंगे। एमडी को गु्रप में जोड़कर कर्मचारियों की उपस्थिति भेजी जाएगी। इससे यह मालूम पड़ेगा की कौनसा कर्मचारी किस बस में है।

इन्होंने बताया...

रोडवेज में कार्यरत सभी कर्मचारियों की हाजिरी अब व्हाट्सअप के जरिए भेजी जा रही है।

एसआर मीणा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज, सिरोही 


Saturday, April 22, 2017

April 22, 2017

रैंकिंग दो अंक गिरी तो शिक्षा अधिकारी हुए सचेत

सिरोही ।
एक तरफ माध्यमिक शिक्षा विभाग नए सत्र की तैयारी में जोर-शोर से जुटा है, वहीं माध्यमिक शिक्षा परिषद की रिपोर्ट ने सिरोही के शिक्षा अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। 18 बिंदुओं पर जारी रिपोर्ट में चार तो ऐसे हंै जिनमें जिले की प्रगति रिपोर्ट नगण्य है। ऐसे में इसका नतीजा रैंकिंग के रूप में भुगतान पड़ा है। मार्च में 
सिरोही को शिक्षा के क्षेत्र में 20वीं रैंकिंग मिली जबकि फरवरी में 18वीं थी। दो रैंक गिरने के बाद शिक्षा अधिकारियों में भी खलबली मची हुई है। अब शिक्षा अधिकारियों ने अप्रेल की रंैकिंग सुधारने के लिए 18 बिंदुओं पर मंथन शुरू कर दिया है।
न पैसा लिया और 
न ही बैठक हुई
मार्च में रैंकिंग गिरने के बड़े कारण स्कूलों द्वारा सांसद, विधायक, जनसहयोग, भामाशाह आदि से पर्याप्त पैसा ही नहीं लेना और उपखंडअधिकारी की अध्यक्षता में ब्लॉक स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक नहीं होना बताया जा रहा है। आंगनबाड़ी को स्कूलों में मर्ज करना था। अभी तक जिले में 13 आंगनबाड़ी ही मर्ज हुई थीं। इसके बाद जो मर्ज हुईं, उसकी रिपोर्ट अपडेट नहीं की। सबसे बड़ी लापरवाही एसडीएमसी के मामले में की गई। इनको पैनकार्ड लेकर इनकम टैक्स में छूट के लिए रजिस्टेशन करवाना था ताकि कोई दानदाता पैसा दें तो एपीजी में लाभ मिले सके, लेकिन सिरोही जिले की रिपोर्ट शून्य है। जिले में सरकारी, संस्कृत व मॉडल स्कूल करीब 220 हैं। केवल देरोल मॉडल स्कूल के प्रधानाचार्य दीपचन्द्र ने 80जी पंजीयन करवाया हुआ है।
अब यह प्लान
- आंगनबाड़ी के नियमित निरीक्षण के साथ कुछ का मॉडल के रूप में चयन करना और अन्य पीईईओ को विजिट करवाना।
- एसआईक्यूई (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहल) की समझ बनाने तथा अच्छे विद्यालयों का चयन करने, इसकी क्रियान्विति को लेकर अन्य की विजिट करवाना।
- क्लिक योजना के संचालन के लिए पोर्टल से एमओयू की प्रति डाउनलोड कर शीघ्र कार्य  करवाना।
- विद्यालय विकास/खेल मैदान आवंटन, वाउण्डीवॉल आदि जनसहयोग एवं मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में करवाना। सांसद व विधायक मद से भी राशि जुटाना।
मूल्यांकन में 
इनका समावेश
- नामांकन वृद्धि (माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय)
- बोर्ड परीक्षा परिणाम उन्नयन
- उपचारात्मक शिक्षण, आदर्श विद्यालयों में विद्युतीकरण।
- आदर्श विद्यालयों में खेल मैदान की उपलब्धता व आदर्श विद्यालयों में मनरेगा के तहत विकास।
- आदर्श विद्यालयों में रमसा/मनरेगा के अतिरिक्त अन्य स्कीमों से भौतिक विकास के लिए प्राप्त बजट लेना।
- आदर्श विद्यालयों में आईसीटी लैब की उपलब्धता, ब्रॉडबैंड इंटरनेट की उपलब्धता।
- स्कूलों में सेनेटरी नेपकिन डिस्पेन्सर/इंसीनरेटर कीस्थापना।
- जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी बैठक, जिला सलाहकार समिति की बैठक।
- आंगनबाडिय़ों के स्कूलों में विलय, विद्यालय विकास योजना, 80जी पंजीयन कराना।
इनका कहना...
जयपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय कार्यों के आधार पर रिपोर्ट आई है। इसमें सिरोही रैंकिंग में दो स्थान लुढ़का है। कमियों को दूर कर अप्रेल में टॉप टेन में स्थान बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
-चन्द्रमोहन उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) सिरोही

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Thursday, April 20, 2017

April 20, 2017

सिरोही की निगाहें-प्रवेशोत्सव के पहले ही चरण में लक्ष्य पाने की कवायद

सिरोही ।
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, फिर हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए, सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। हिन्दी गजल के पुरोधा दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां अब शिक्षा विभाग में दोहराई जाएगी। सिरोही को शैक्षणिक सत्र 2017-18 के प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जो लक्ष्य दिया गया है वह पहले ही चरण में पूरा हो। इसके लिए शिक्षा विभाग ने प्लानिंग की है। शिक्षक प्रवेशोत्सव के दूसरे चरण का इंतजार न कर पहले ही चरण में लक्ष्य प्राप्त करेंगे। अब शिक्षक पहले ही चरण में जिले को दिए हुए लक्ष्य प्राप्ति के लिए ऐडी चोटी का जोर लगाएंगे। शिक्षक सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों में विश्वास पैदा करेगा कि आपके लाल को सरकारी स्कूलों में दाखिला (प्रवेश) दिलाओ। साथ ही समाज को सही नेतृत्व देने के लिए, बच्चे की समझ बढ़ाने के लिए अब समन्वित प्रयास किए जाएंगे। बच्चे का प्रवेश स्कूल में होने के बाद पोर्टल पर एंट्री के साथ ही प्रवेश आवेदन पत्र एवं कक्षा उपस्थिति रजिस्टर में बालक के नाम के साथ प्रवेश कराने वाले प्रेरक शिक्षक का नाम आवश्यक रूप से लिखना होगा। नवप्रवेशी बच्चे को नए माहौल में घुलने-मिलने, झिझक दूर करने के लिए विद्यालय में उपलब्ध संसाधानों टीवी, एलईडी, खेल-सामग्री, कम्प्यूटर लैब, खिलौने का उपयोग करना होगा। ऐसे में जब बच्चा छुट्टी के बाद हंसता हुआ घर जाएगा तो एक नए बच्चे को अगले दिन अपने साथ लेकर आएगा।
यह उपाय भी होगा कारगर
प्राथमिक कक्षाओं में ठहराव सुनिश्चित करने के लिए पूरे समय कक्षा में अध्यापक का होना जरूरी है। इसके लिए संस्था प्रधान एसएमसी, जनसहयोग, भामाशाहों की मदद से स्थानीय शिक्षित महिला को मानदेय पर अध्यापिका के रूप में लगा सकते है। सब कुछ उम्मीदों के मुताबिक हुआ तो समन्वय और सामंजस्य से स्कूलों में प्रथम चरण में ही लक्ष्य अर्जित हो जाएगा। ऐसे में प्रवेशोत्सव का दूसरा चरण तो शिक्षकों की उपलब्धियों की चर्चा का होगा। साथ ही नामांकन में वृद्धि होने से युवकों को सम्मानजनक रोजगार मिलेगा। स्कूलों में सुंदरता और संसाधनों में बढ़ोतरी तो होगी ही, नए पद भी सृजित होंगे।
इस तरह होगा लक्ष्य प्राप्त
प्रवेशोत्सव का पहला चरण 26 अप्रेल से 10 मई तक।
अपने परिक्षेत्र (कैचमेंट एरिया) का नजरी नक्शा बनाना।
नजरी नक्शा के मुताबिक प्रवेश योग्य बच्चों की पहचान कर ली है।
किस शिक्षक को किन पांच बच्चों का नवीन प्रवेश कराना है।
लक्षित समूह को विद्यालय से जोडऩे के लिए सामूहिक रूप से भ्रमण कर अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों में मिलने वाली सुविधाओं की नियमित चर्चा करना।
समाज ने सदा शिक्षक का विश्वास किया है आगे भी करेगा। समन्वय, सहयोग और सामंजस्य से सफलता मिलेगी।
नवीन प्रवेश सबसे पहले ऐसे बालकों का कराना हो जो संभ्रांत/शिक्षित/नौकरी पेशा परिवार से हो।
योजना बनाई है...
प्रवेशोत्सव को लेकर कार्य योजना बनाई है। यह संस्था प्रधानों, शिक्षकों को भेज दी है। सभी से उम्मीदें और विश्वास है कि पहले चरण के समाप्ति  10 मई तक लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
चन्द्रमोहन उपाध्याय, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) सिरोही


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authorHello, my name is Jack Sparrow. I'm a 50 year old self-employed Pirate from the Caribbean.
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